किडनी स्टोन, जिसे आम भाषा में पथरी कहा जाता है, दरअसल किडनी में बनने वाला कठोर (सख्त) जमाव होता है। यह छोटे-छोटे क्रिस्टल से बनता है, जो धीरे-धीरे आपस में जुड़कर पत्थर जैसा रूप ले लेते हैं।
हमारी किडनी खून को साफ करती है और शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। लेकिन जब कुछ खनिज और लवण शरीर में ज्यादा मात्रा में जमा होने लगते हैं और पूरी तरह घुल नहीं पाते, तो वे किडनी के अंदर जमकर पथरी बना सकते हैं।
किडनी स्टोन एक दिन में नहीं बनती। यह एक धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है। जब पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड या अन्य खनिजों की मात्रा बढ़ जाती है और पानी कम होता है, तो ये तत्व घुलने के बजाय क्रिस्टल के रूप में जमने लगते हैं। शुरू में ये बहुत छोटे कण होते हैं, जिन्हें अक्सर शरीर खुद ही बाहर निकाल देता है। लेकिन अगर ये कण बार-बार बनते रहें या पेशाब गाढ़ा बना रहे, तो ये आपस में चिपककर बड़े आकार की पथरी बना सकते हैं।
पथरी बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
कुछ लोगों में शरीर की बनावट या मेटाबॉलिज्म ऐसा होता है कि उनमें पथरी बनने की संभावना अधिक रहती है।
किडनी स्टोन का आकार बहुत छोटा भी हो सकता है जैसे रेत का कण और कभी-कभी यह मटर या उससे भी बड़ा हो सकता है। छोटी पथरी कई बार बिना ज्यादा दर्द के पेशाब के साथ निकल जाती है, लेकिन बड़ी पथरी पेशाब की नली में फंस जाए तो तेज दर्द का कारण बनती है।
पथरी के प्रकार भी अलग-अलग होते हैं:
यह सबसे सामान्य प्रकार की पथरी है। ज्यादातर मामलों में पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट से बनी होती है, हालांकि कुछ मामलों में यह कैल्शियम फॉस्फेट की भी हो सकती है। यह तब बनती है जब पेशाब में कैल्शियम या ऑक्सलेट की मात्रा ज्यादा हो जाती है और वे पूरी तरह घुल नहीं पाते। ज्यादा नमक, कुछ खास तरह के आहार या कम पानी पीने से इसका खतरा बढ़ सकता है।
यह पथरी तब बनती है जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसा अधिक प्रोटीन वाला भोजन, खासकर लाल मांस, या गाउट जैसी समस्या में देखा जाता है। अगर पेशाब ज्यादा अम्लीय (एसिडिक) हो, तो यूरिक एसिड आसानी से क्रिस्टल बनाकर पथरी में बदल सकता है। इस तरह की पथरी कई बार दवाइयों और खानपान में बदलाव से घुल भी सकती है।
यह पथरी आमतौर पर मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) के बाद बनती है। बैक्टीरिया पेशाब के रसायनों को बदल देते हैं, जिससे स्ट्रुवाइट नामक पदार्थ जमने लगता है। इस तरह की पथरी तेजी से आकार में बढ़ सकती है और कई बार बड़ी होकर पूरी किडनी के हिस्से को घेर लेती है। इसलिए बार-बार होने वाले संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
यह दुर्लभ प्रकार की पथरी है और आमतौर पर आनुवंशिक कारणों से बनती है। सिस्टीन नामक अमीनो एसिड पेशाब में अधिक मात्रा में निकलने लगता है और धीरे-धीरे पथरी बना सकता है। ऐसे मरीजों में पथरी बार-बार बनने की संभावना रहती है, इसलिए उन्हें लंबे समय तक नियमित देखभाल और विशेष आहार की जरूरत हो सकती है।
यह किडनी स्टोन का सबसे आम कारण माना जाता है।जब हम पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है। ऐसे में उसमें मौजूद खनिज और लवण पूरी तरह घुल नहीं पाते और छोटे-छोटे क्रिस्टल बनकर जमा होने लगते हैं। यही क्रिस्टल आगे चलकर पथरी का रूप ले सकते हैं। खासकर गर्म मौसम या ज्यादा पसीना आने की स्थिति में पानी की कमी जल्दी हो सकती है।
खाने में ज्यादा नमक लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कैल्शियम स्टोन बनने का खतरा बढ़ता है। इसी तरह, बहुत अधिक प्रोटीन खासकर लाल मांस या हाई-प्रोटीन डाइट यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा सकती है। इससे यूरिक एसिड स्टोन बनने की संभावना रहती है। संतुलित आहार रखना इसलिए जरूरी है, ताकि शरीर में किसी भी तत्व की मात्रा असामान्य रूप से न बढ़े।
बैठे-बैठे काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता वजन भी पथरी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। मोटापे की स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म बदलता है, जिससे पेशाब की संरचना पर असर पड़ सकता है। अनियमित दिनचर्या और जंक फूड का ज्यादा सेवन भी अप्रत्यक्ष रूप से समस्या को बढ़ा सकता है।
अगर परिवार में किसी को पहले किडनी स्टोन रही हो, तो दूसरों में भी इसका खतरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है। कुछ लोगों की शारीरिक बनावट या रासायनिक संतुलन ऐसा होता है कि उनमें पथरी बनने की प्रवृत्ति अधिक रहती है। ऐसे मामलों में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।
कुछ खास दवाइयाँ जैसे लंबे समय तक ली जाने वाली कुछ सप्लीमेंट्स या विशेष चिकित्सीय दवाएँ पेशाब में खनिजों की मात्रा बढ़ा सकती हैं। इससे पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि दवा बंद कर दी जाए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा लेनी चाहिए और जरूरत हो तो नियमित जांच करानी चाहिए।
यह पथरी का सबसे पहचानने वाला लक्षण है।दर्द अचानक शुरू होता है और बहुत तेज हो सकता है। आमतौर पर कमर के एक साइड से शुरू होकर पेट के निचले हिस्से या जांघ तक फैल सकता है। दर्द लहरों की तरह आता-जाता है और व्यक्ति को बेचैन कर देता है। कई लोग इसे जीवन के सबसे तेज दर्दों में से एक बताते हैं।
जब पथरी पेशाब की नली में पहुंचती है, तो पेशाब करते समय जलन या चुभन महसूस हो सकती है। कभी-कभी यह लक्षण मूत्र संक्रमण जैसा लगता है, इसलिए सही जांच जरूरी होती है।
पथरी नली की अंदरूनी परत को रगड़ सकती है, जिससे हल्का या साफ दिखाई देने वाला खून पेशाब में आ सकता है। पेशाब गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिख सकता है। यह लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
तेज दर्द के कारण कई बार मरीज को मितली आने लगती है या उल्टी हो सकती है। दर्द और शरीर की प्रतिक्रिया मिलकर यह परेशानी पैदा करते हैं।
ऐसा महसूस हो सकता है कि बार-बार पेशाब की जरूरत है, लेकिन हर बार मात्रा कम निकलती है। अगर पथरी नली के निचले हिस्से में फंस जाए, तो यह लक्षण ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
अल्ट्रासाउंड सबसे सामान्य और सुरक्षित जांच है। इसमें किसी प्रकार का दर्द नहीं होता और रेडिएशन भी नहीं दिया जाता। इस जांच से किडनी में मौजूद पथरी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। छोटी पथरी कभी-कभी साफ दिखाई नहीं देती, लेकिन बड़ी पथरी या किडनी में सूजन का पता चल जाता है।अक्सर डॉक्टर शुरुआत इसी जांच से करते हैं।
अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या स्थिति स्पष्ट न हो, तो CT स्कैन करवाया जाता है। यह जांच ज्यादा सटीक मानी जाती है। CT स्कैन से पथरी का सही आकार, उसकी सटीक जगह और संख्या का पता चल जाता है। छोटी से छोटी पथरी भी इसमें दिखाई दे सकती है। इसलिए कई मामलों में यह सबसे भरोसेमंद जांच मानी जाती है।
खून और पेशाब की जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि पथरी क्यों बनी हो सकती है।
ये जांचें आगे के इलाज और बचाव की योजना बनाने में मदद करती हैं।
कुछ प्रकार की पथरी एक्स-रे में दिखाई दे जाती हैं, खासकर कैल्शियम वाली पथरी। लेकिन सभी पथरी एक्स-रे में नहीं दिखतीं। इसलिए कई बार एक्स-रे को सहायक जांच के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, खासकर इलाज के दौरान यह देखने के लिए कि पथरी का आकार कम हुआ है या नहीं।
अगर पथरी छोटी है (आमतौर पर 5 मिमी तक), तो डॉक्टर दर्द कम करने की दवाइयाँ और ऐसी दवाएँ देते हैं जो पथरी को आसानी से पेशाब के रास्ते बाहर निकलने में मदद करें। साथ ही, संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दी जाती है। कई मामलों में कुछ हफ्तों के अंदर पथरी खुद ही निकल जाती है। इस दौरान पानी ज्यादा पीना बहुत जरूरी होता है।
छोटी पथरी के मामले में सबसे पहला और सरल उपाय है ज्यादा पानी पीना। दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी लेने से पेशाब पतला रहता है और पथरी के छोटे कण बाहर निकलने में मदद मिलती है। कभी-कभी अस्पताल में फ्लूइड थेरेपी भी दी जाती है, खासकर अगर मरीज को उल्टी या डिहाइड्रेशन की समस्या हो।
ESWL यानी एक्स्ट्राकॉर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी। इसमें बाहर से मशीन के जरिए तेज तरंगें (शॉक वेव) भेजकर पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है।इसके बाद ये छोटे टुकड़े पेशाब के साथ बाहर निकल जाते हैं। यह प्रक्रिया बिना चीरा लगाए की जाती है और आमतौर पर मध्यम आकार की पथरी के लिए उपयोगी होती है।
लेजर तकनीक का उपयोग तब किया जाता है जब पथरी पेशाब की नली में फंसी हो या आकार में थोड़ी बड़ी हो। एक पतली नली (स्कोप) के जरिए अंदर पहुंचकर लेजर की मदद से पथरी को तोड़ा जाता है। यह तरीका काफी सटीक और प्रभावी माना जाता है। मरीज को आमतौर पर कम समय में राहत मिल जाती है।
URS यानी यूरेटरोस्कोपी। इसमें एक पतला उपकरण पेशाब की नली के रास्ते अंदर ले जाकर पथरी तक पहुंचाया जाता है। फिर पथरी को या तो निकाला जाता है या लेजर से तोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया खासकर तब की जाती है जब पथरी पेशाब की नली में अटकी हो और दर्द बार-बार हो रहा हो।
जब पथरी बहुत बड़ी हो (आमतौर पर 2 सेंटीमीटर से ज्यादा) या किडनी में जटिल स्थिति में हो, तब PCNL (पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी) की जरूरत पड़ती है।
इसमें पीठ के जरिए एक छोटा सा चीरा लगाकर सीधे किडनी तक पहुंचा जाता है और पथरी को निकाला जाता है। यह सर्जरी थोड़ी बड़ी प्रक्रिया होती है, लेकिन बड़ी और जटिल पथरी के लिए प्रभावी मानी जाती है।
अगर पथरी का आकार बड़ा है, खासकर 10 मिमी से ज्यादा, तो उसके अपने-आप निकलने की संभावना कम हो जाती है। बड़ी पथरी पेशाब की नली में फंस सकती है और लगातार दर्द या रुकावट पैदा कर सकती है। ऐसे मामलों में ESWL, URS या PCNL जैसी प्रक्रिया की सलाह दी जा सकती है।
कभी-कभी पथरी छोटी होने के बावजूद बहुत ज्यादा तकलीफ देती है। अगर तेज दर्द बार-बार हो रहा हो और दवाइयों से राहत न मिल रही हो, तो सर्जिकल हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है। लगातार दर्द का मतलब है कि पथरी अपनी जगह बदल रही है या रास्ता रोक रही है।
अगर पथरी के साथ मूत्र संक्रमण भी हो जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। बुखार, ठंड लगना, पेशाब में जलन या मवाद जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत इलाज जरूरी होता है। ऐसी हालत में पथरी को हटाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि रुकावट के साथ संक्रमण खतरनाक साबित हो सकता है।
अगर पथरी पेशाब के प्रवाह को रोक दे और किडनी में सूजन आने लगे, तो यह आपात स्थिति हो सकती है। पेशाब कम आना या बिल्कुल रुक जाना गंभीर संकेत है। ऐसे में तुरंत चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाता है, ताकि किडनी को नुकसान न पहुंचे।
सबसे जरूरी और सबसे आसान उपाय है भरपूर पानी पीना। दिन भर में इतना पानी जरूर लें कि पेशाब का रंग हल्का और साफ रहे। पानी पेशाब को पतला रखता है, जिससे खनिज और लवण जमा नहीं हो पाते। गर्मियों में या ज्यादा पसीना आने पर पानी की मात्रा और बढ़ा देनी चाहिए।
खाने में संतुलन बहुत जरूरी है। हरी सब्जियां, ताजे फल और फाइबर से भरपूर भोजन शरीर के लिए फायदेमंद होता है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन या बहुत ज्यादा ऑक्सलेट वाले खाद्य पदार्थ लेने से बचना चाहिए, खासकर अगर पहले पथरी रह चुकी हो।
अधिक नमक शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा सकता है, जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ता है।फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और ज्यादा मसालेदार चीजें सीमित मात्रा में लें। घर का सादा और ताजा भोजन लंबे समय में ज्यादा सुरक्षित रहता है।
रोजाना हल्का-फुल्का व्यायाम या तेज चाल से चलना भी मददगार होता है। व्यायाम शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखता है और वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है। मोटापा भी पथरी के जोखिम को बढ़ा सकता है, इसलिए सक्रिय रहना जरूरी है।
अगर पहले किडनी स्टोन हो चुकी है या परिवार में इसका इतिहास है, तो समय-समय पर जांच कराते रहना समझदारी है। डॉक्टर पथरी के प्रकार के अनुसार विशेष सलाह दे सकते हैं जैसे किस चीज से परहेज करना है और क्या मात्रा में लेना है।
सबसे पहले पानी।
दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। कोशिश करें कि पेशाब का रंग हल्का रहे।
इसके अलावा:
नींबू में मौजूद साइट्रेट पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकने में मदद कर सकता है। फाइबर वाला भोजन पाचन और मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखता है।
डॉ. निनाद तंबोली नवी मुंबई के एक प्रसिद्ध मूत्र रोग विशेषज्ञ हैं, जिन्हें जटिल मूत्र रोगों के उपचार में व्यापक विशेषज्ञता प्राप्त है। एक दशक से अधिक के अनुभव के साथ, डॉ. तंबोली अपने रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण और उन्नत शल्य चिकित्सा कौशल के लिए जाने जाते हैं।नवी मुंबई के एक विश्वसनीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. निनाद तंबोली के नेतृत्व में स्थित यूरोलॉजी क्लिनिक, मूत्र संबंधी विशेषज्ञ उपचारों के लिए आपका विश्वसनीय गंतव्य है। यह क्लिनिक मूत्र और प्रजनन स्वास्थ्य के उन्नत उपचारों में विशेषज्ञता रखता है।
किडनी स्टोन में डाइट बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सही खानपान अपनाकर न केवल वर्तमान समस्या को संभाला जा सकता है, बल्कि भविष्य में दोबारा पथरी बनने से भी बचा जा सकता है। थोड़ी सावधानी, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार यही सबसे सरल और प्रभावी बचाव है।
यह पूरी तरह पथरी के आकार और उसकी जगह पर निर्भर करता है। छोटी पथरी (4–5 मिमी तक) अक्सर 1–3 हफ्तों में दवाइयों और ज्यादा पानी से अपने-आप निकल सकती है।
हाँ, कई मामलों में निकल सकती है। अगर पथरी छोटी है तो डॉक्टर दवाइयों, दर्द नियंत्रक और ज्यादा फ्लूइड लेने की सलाह देते हैं। इससे पथरी पेशाब के रास्ते बाहर आ सकती है।
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